आज के समय में आतंकवाद एक ऐसा विषय है जिसके बारे मैं चर्चा आम हो गई है, आज इस देश में हर कोने पर इसका नाम है और हर कोई इसके बारे में बात करता है, हम चाहे किसी धर्म से हो, या किसी जाति विशेष से, प्रभावित हर कोई है, पर प्रश्न यह उठता है कि आख़िर आतंकवाद से मिलता क्या है ? या तो केवल कुछ लोग अपना स्वार्थ सिद्ध करने के लिए इस तरह की गतिविधियों मैं लिप्त रहते हैं, या देश की शान्ति व्यवस्था को छिन्न भिन्न करने के उद्देश्य से ऐसे काम किए जाते हैं. जहाँ तक आतंकवाद का प्रश्न हैं इसको किसी संप्रदाय विशेष से जोड़ना ग़लत है क्योकि अगर ये किसी संप्रदाय के कारण होता तो जरुर इसका कोई न कोई समाधान होता, पर इस समस्या का आज तक कोई समाधान नही निकला, तब ये भी कहा जा सकता है कि ये स्वार्थ सिद्धि है जिसके कारण लोग इस तरह के काम करते हैं, मैं इस जगह आप सबका ध्यान महाराष्ट्र कि तरफ़ ले जाना चाहता हूँ, जहा तक मुझे लगता है कि महाराष्ट्र मैं जो कुछ हो रहा है वो भी तो एक प्रकार का आतंकवाद ही तो है, कुछ बड़े लोग, नाम न लेकर कहना चाहूगा कि केवल अपने स्वार्थ के लिए राजनीति कर रहे हैं और वो राजनीति किसी आतंकवाद से कम है क्या? आज हमारे देश मैं जहा सभी धर्मो को , जातियों को बराबर का हक मिला हुआ है, वहां किसी प्रदेश को इस देश से अलग समझना कहा कि राजनीति है? और सबसे बड़ी बात वहां रहने वाले लोगो को जिस तरह से प्रताडित किया जा रहा है वह आतंकवाद नही तो और क्या है? इसे कोई और नाम देना मुझे समझ नहीं आता, आज अगर पूरा देश आतंकवाद को हटाने के लिए सोच रहा है तो क्या हम महाराष्ट्र मैं हो रहे आतंकवाद को हटाने के लिए बात नही कर सकते जबकि इसका सीधा सम्बन्ध किसी संप्रदाय विशेष से नही है।
बस बात यही से शुरू होती है कि आख़िर हम चुप क्यो हैं? क्या हम मिलकर आवाज नही उठा सकते उन लोगो के खिलाफ जो हमारे देश को, प्रदेशो या बोली जाने वाली भाषा के आधार पर विभाजित करना चाहते हैं, जैसा कि मैंने पहले कहा कि आतंकवाद का एक अर्थ देश की शान्ति व्यवस्था को छिन्न भिन्न करना है तो क्या महाराष्ट्र मैं जो कुछ भी हो रहा है उससे देश की शान्ति व्यवस्था भंग नही होती क्या? तब तो हम इसको भी आतंकवाद के श्रेणी मैं रख सकते हैं, और अगर ये भी आतंकवाद है तो इसके खिलाफ वही ठोस कदम क्यो नही उठाये जा रहे जो आतंकवाद फैलाने वालो के खिलाफ उठाये जाते हैं, आज महाराष्ट्र मैं खुले आम उत्तर भारतियों को परेशान किया जा रहा है जो हमारे देश की अखंडता और प्रभुसत्ता के लिए खतरनाक है, आज मैं अपने देश के सम्मानीय नागरिकों से कहना चाहता हूँ की आप सब इस विषय पर जरुर समय दे ताकि ये बात आम जनता तक पहुच सके की आतंकवाद वो नही जो हमें बताया गया है बल्कि आतंकवाद वो है जो हमें परेशान करता है शान्ति से जीवन व्यतीत करने से ......................
बस बात यही से शुरू होती है कि आख़िर हम चुप क्यो हैं? क्या हम मिलकर आवाज नही उठा सकते उन लोगो के खिलाफ जो हमारे देश को, प्रदेशो या बोली जाने वाली भाषा के आधार पर विभाजित करना चाहते हैं, जैसा कि मैंने पहले कहा कि आतंकवाद का एक अर्थ देश की शान्ति व्यवस्था को छिन्न भिन्न करना है तो क्या महाराष्ट्र मैं जो कुछ भी हो रहा है उससे देश की शान्ति व्यवस्था भंग नही होती क्या? तब तो हम इसको भी आतंकवाद के श्रेणी मैं रख सकते हैं, और अगर ये भी आतंकवाद है तो इसके खिलाफ वही ठोस कदम क्यो नही उठाये जा रहे जो आतंकवाद फैलाने वालो के खिलाफ उठाये जाते हैं, आज महाराष्ट्र मैं खुले आम उत्तर भारतियों को परेशान किया जा रहा है जो हमारे देश की अखंडता और प्रभुसत्ता के लिए खतरनाक है, आज मैं अपने देश के सम्मानीय नागरिकों से कहना चाहता हूँ की आप सब इस विषय पर जरुर समय दे ताकि ये बात आम जनता तक पहुच सके की आतंकवाद वो नही जो हमें बताया गया है बल्कि आतंकवाद वो है जो हमें परेशान करता है शान्ति से जीवन व्यतीत करने से ......................
आशा करता हूँ की जो भी मैंने लिखा है वो आप सबको सही लगेगा और आप सब मुझे सहयोग प्रदान करते रहेगे ।
धन्यवाद


12 comments:
वाह, क्या बात है, अच्छा लगा की तुमने भी ब्लॉग बनाया और कुछ लिखना प्रारम्भ किया. अच्छा लिखते हो ये पहले ही लेख से पता चल गया है, पर हमेशा इससे और अच्छा लिखते जाओ लिखते जाओ ऐसी शुभकामनाएं हैं.
आतंकवाद के बारे में तुमने बिल्कुल सही लिखा है, और अच्छी बात है की इसके लिए किसी एक जाति या धर्म को जिम्मेदार न ठहराते हुए पूरे समाज पर प्रश्न लगाया है. नही तो आजकल सभी बस एक दूसरे धर्म को कोस कर टाइम पास कर रहे हैं.
स्वागतम.
Ankur, bohothee achha likha hai aapne....! Har vicharwant wyakteeko yahee sochna chahiye...chahe akele, chahe milkar hamen aawaz uthanee hee chahiye. Maine ispar( Jateeywadpe) kuchh kavitayen aur "Pyarkee Raah Dikha duniyako" is sheesharkse lekh likha hai huaa hai. Kabhi fursatse padh lena....2007 ki June/july ke archivesme jaake gar dekh sako...mujhe badee khushee hogee.
Tumharee sonchme mai pooree tarah tumhare saath hun. Batao, kya karna chahte ho, aur kis tarahse?
Ek aur baat kahun??Pracheen Bharteey bhashame "dharm" shabka istemaal " swabhav dharm" Ya "nisarg dharmko" leke hota tha...naakee koyi jaat paat...jaise ki agneeka dharm hai jalna aur jalana...aur nisarg ekdam samta rakhata hai...chahe aap koyi hon, aagme haath daloge to wo jalega...ye nisarg niyam hai, dharm hai...ham uskaa sahee arth bhool gaye.
Mahabharat "dharm yuddh " kelaya, kyon? Wahan to do bhinn bhinn jaateeke log lad nahee rahe the...ye dharm aur adharmke beechhki ladayee thee...isliye Arjun "dharam sankat"me tha !
Itne achhe vichaar pesh karneke liye tahe dilse badhayee detee hun!
भैया आपने अपने ब्लाग मे बहुत ही ज्वलन्त मुद्दा उठाया है मेरा मानना है कि इस विषय पर सभी लोगो को खुल कर सोचना चाहिये ।
bahut hi achcha likha hai bhai. likhte rahiye. swagat hei.
hmmm sahi likha hai bhaiya...
really nice....
hope ye blog un logo ka margdarsan jaroor karega jo aisi KHARB GATIVIDIYON me LIPT hai..aur unhe sochane ko MAJBOOR karega...
:)
Ankur, I feel that a society where people think like you would be an ideal one. You have raised the points related to terrorism by your heart and I am sure that you touched the heart of masses. The role of leaders in true way is questionable not only in helping the acts which resembles terrorism but also instilling fear in common man. There is no democracy in our country. We are still ruled by our leaders. they are not answerable to us in any way. that is why they have become kings and keep common man in illusion by telling that the democracy is prevailing.
Ankur, I feel that a society where people think like you would be an ideal one. You have raised the points related to terrorism by your heart and I am sure that you touched the heart of masses. The role of leaders in true way is questionable not only in helping the acts which resembles terrorism but also instilling fear in common man. There is no democracy in our country. We are still ruled by our leaders. they are not answerable to us in any way. that is why they have become kings and keep common man in illusion by telling that the democracy is prevailing.
बड़े भईया, चुप ना रहो, और जब किसी ज्वलंत मुद्दे पर बोलो तो किसी को अच्छा लग रहा है कि नहीं परवाह मत करो... बस चलो चलते जाओ... लोग आपका अनुगमन कर ही लेते हैं... वैसे शानदार लिखा है... आपकी सोच से हमे अवगत कराने का शुक्रिया।
Ankur...mere lekh" Pyarki Raah Dikha Duniyako", pe tippaneeke liye bohot, bohot shukrguzar hun !
Jab aapka ye lekh padha tha, tabhee mujhe laga ki yahan kuchh to chingaree hai...isiliye apne lekh ki taraf nirdesh kiya!
मैं आपसे पूरी तरह सहमत हूँ.. ये मुंबई में बैठे देश के दूसरे विभाजन की राजनीति कर रहे हैं. इन्हें स्वयं को भारतीय कहलाने से ज्यादा महाराष्ट्रियन होने का गर्व है. भोली-भाली जनता के मन में भी ज़हर घोलते हैं और ये अपनी तरह का आतंकवाद है जहाँ देश के दूसरे हिस्सों से आए लोग शायद एक डर और अलगाव सा महसूस करते हैं. "वसुधैव कुटुम्बकम" के आदर्शों वाले भारत में अपने ही देश में ऐसा माहौल! हैरानी की बात है...
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