
ब्लॉग बनाते वक्त मैंने ऐसा नही सोचा था कि मैं इतने दिनों बाद लिखूगा, मैं सोचता था कि नियमित रूप से कुछ न कुछ लिखता रहूगा, पर पता नही ऐसा क्या हुआ कि लिखने से मन ही उठ गया, ऐसा लग रहा था कि न जाने कितने लोग ब्लोग्स में लिख रहे पर सुन कोई रहा है कि नही , आज अचानक शमा जी से बात हुई एक लंबे विराम के बाद , उन्होंने मुझे फिर से लिखने के लिए कहा और बहुत सी प्रेरणादायी बातें बताई ..........
ये जरुरी नही कि हम जो लिखे वो सराहा ही जाए, जरुरी ये है कि आप क्या लिख रहे हैं और उसका हमारे समाज पर क्या प्रभाव है .....आज मैं आप सबके सामने आतंकबाद से जुडा एक नया विषय प्रस्तुत कर रहा हूँ ...उम्मीद है कि आप जरुर लाभान्वित होगे ...........
लगभग १५० साल पुराना इंडियन एविडेंस एक्ट,(IEA) कलम २५ और २७ के तहेत बने कानून जिन्हें बदल ने की निहायत आवश्यकता है.... आप सब जानते हैं कि किसी भी अपराधी को सजा दिलाने के लिए एक अदद गवाह कि जरुरत होती है, अब प्रश्न ये उठता है कि क्या हर जगह गवाह मौजूद है ? आखिर कहा से पुलिस गवाह को लाये ? एक्ट में लिखा है कि जब भी कोई अपराधी जुर्म करता हुआ पकडा जाये तो अपराधी का वही पर पंचनामा करना परेगा वो भी २ गवाह कि मौजूदगी में ........................
अब मैं आपको बताता हूँ कि हमारे देश मैं फ़ैल रहे आतंकबाद में इसका क्या सहयोग है. हमारे देश के कुछ राज्य देश कि सीमाओं से सटे हुए हैं, देश में फ़ैल रहे आतंकबाद में प्रयोग हो रहे हथियार और बारूद शायद इन्ही सीमाओं से आता है, अब आप सोचेगे कि आखिर जब ये तस्करी होती है तब इनको पकडा क्यों नहीं जाता। मैं आपको बताना चाहूगा कि राजस्थान में सीमा से सटे हुए थानों में जो पुलिसवाले होते हैं उनकी जिम्मेदारी पूरी सीमा तक कि होती है, सीमा की दूरी थाने से २०-२५ किलोमीटर होती है, बीच में पूरा रेगिस्थान होता है, तब वो पुलिसवाला अकेला ऊट पर सवार होकर निकल परता है जुर्म की तलाश में ........... और हमेशा ऐसा होता है कि कोई न कोई तस्कर उसके हाथ में पर जाये, अब उसके सामने दिक्कत ये होती है कि आखिर इस रेगिस्थान में जहा २०-२५ किलोमीटर में कोई इंसान नज़र नहीं आता वहा वो गवाह कहा से लाये.... तब वो पुलिसवाला उस अपराधी को अपने साथ ही ऊट पर बिठाकर निकल परता है गवाह कि तलाश में............ मैं आपको बताता हूँ कि पंचनामा कैसे बनाता है वो ( मजबूरी में ) । वो जाता है पास के किसी गाव में और वहा के किन्ही २ लोगो को पूरी घटना बताकर पंचनामा में गवाह बना देता है और अपराधी को थाने में बंद कर देता है । अब शुरु होती है अपराधी पर केस की प्रक्रिया.... जब उस अपराधी पर केस चलता है तो कोर्ट में वो आसानी से गवाह के बयान पर ही छूट जाता है क्योकि गवाह तो मौका अ बारदात पर था नहीं। उसको तो वही पता है जो उसको बताया गया है, ऐसी परिस्थिति में गवाह वकील के प्रश्नों में फस जाता है और अपराधी बाइज्जत बरी हो जाता है... अब प्रश्न यह है की आखिर उस अपराधी को सजा कैसे मिले जिसको देखने को कोई गवाह नहीं है और उसको सजा कैसे मिले ?
में आप सबसे कहना चाहूगा की अगर हम अपने १५० साल पुराने इंडियन एविडेंस एक्ट में कुछ बदलाव कर दे तो हो सकता है कि आतंकबाद कि समस्या में कुछ अंकुश लग जाये....... अपील की है मैंने आपसबसे कि इस बात को आगे तक जरुर पहुचाये........... देश हित में .......आखिर चुप क्यों ?

6 comments:
बहुत अच्छा लिखा है भाई. यही मुद्दा शमा जी के लेख में भी पढ़ चुका हूँ. आशा है की ये बात सभी के कानों तक पहुंचे और इस पर न केवल ध्यान दिया जाये अपितु ये नियम बदला भी जाए..
लिखते रहिये..
Accha vishay uthaya hai aapne.
Ankur bhai, sahi likha aapne, purane kanoon ko badalne ki jaroorat hai
मुद्दा तो बहुत सही है भईया... पर मै सोच रही थी कि अगर यह कानुन हटा दिया जायेगा तो क्य सबकुछ अच्छा ही होगा? मेरा मतलब की... इस कानुन के रहते हुए भी सच्चे झुठे गवाहो को पेश करके बेकसुर को भी कसुरवार ठहरा दिया जाता है... और तब जब गवाह की जरूरत ही नही पड़ेगी ऐसे स्थिती मे क्या होगा? एक तरह से हम खुली दरिंदगी को छुट तो नही दे देंगे? सिर्फ़ सोच है...
Jawab Garima ko de rahee hun...gawah kee zaroorat to rahegee...! Lekin, jo qanoon ke rakshak hain, unke samaksh dee gawahee, nyayalay me amany hotee hai...wo nahee honi chahiye...!
Police ke kewal, rail ke dibbeme rehnese, apradhee bach nikalta hai...aj kasab kyon fandepe nahee chadh raha? Uske liye, hamaree sarkar kee orse 50,000/- maah wakeel jo muhaiyya kiya gaya hai!
Indian Evidence Act ke tehet (25/27), gar shatir se shatir gunehgaar apna gunah qubool kar le,( chahe wo balatkar ho ya hatya), gar nyayalay me uska wakeel ye saabit kar de,ki, aaspaas kaheen koyi, police kaa wyakti( chahe retired kyon na ho),maujood tha, to us bayan ko 'iqbaliya" bayan nahee kaha jaa sakta...!
Aap shastron kee yaa ganjaa-afeem kee taskaree ke tehet qanoon padhen,to hairan reh jayengi...ye qanoon angrezon ne apne bachaw ke liye banaye the...is deshke liye nahee...!
"Gazab Qanoon",tehat, mera poora article tatha, shri Shekhawat kaa bhashan padhen...phir kahen,ki, kya hona chahiye!
Gar suraksha yantrana se adhik, gunahgaron pe wishwas hai, to phir is yantrana kee zaroorarat kya hai? Tab to ye yantrana honeehee nahee chahiye...!
http://lalitlekh.blogspot.com
Aaj hee maine phir ekbaar,( english me hai)Police reforms ko leke chal rahe sujhawon ke muddon ko apne isee blogpe likha hai.
आपने बहुत बढ़िया जानकारी दी है ...आप ब्लॉग पर कुछ न कुछ लिखते रहिये .कोई न कोई तो पढता ही है और कुछ न कुछ तो अच्छा तो हर एक के लिखने में रहता है ..अच्छा बुरा सब अपनी अपनी पसंद है ..मैंने भी यूँ ही जब ब्लॉग बनाया था तो कुछ पता नहीं था ....धीरे धीरे ब्लॉग पढ़े ..कुछ लिखती रही तो अब ऑफिस और बच्चों से फुर्सत नहीं मिलती फिर भी कभी कभार ही सही लिखने की कोशिश करती रहती हूँ ..
मैं ब्लॉग को भी अपने घर परिवार जैसा मानती हूँ इसलिए इससे मुहं नहीं मोड़ती
आप भी जरुर ऐसा करके देखिये ..अंपने मन की आवाज को बाहर निकालिये ..फिर देखिये .....अपने आस पास जो भी अच्छा बुरा हो उसे भी लिखकर देखिये ....
हार्दिक शुभकामनायें
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